सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कविताएं बच्चों के लिए | Top 10 कविताएं बच्चों के लिए

अगर आप अपने छोटे बच्चों के लिए कविताएं ढूंढ रहे है तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए है, यहां टॉप टेन कविताएं बच्चों को जरूर पसंद आयेगी और इन कविताओं से बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी भी मिलेगी।

आप जब बच्चों को कविताएं पढ़ाये तो लय और ताल का ध्यान रखे, साथ ही अपने आस पास के परिवेश और पर्यावरण की तरफ बच्चों का ध्यानाकर्षण भी करवाया जाय।

अगर आपको ये कविताएं अच्छी लगे जो अपने चाहने वालों को जरूर शेयर करे।





1. कौन है छोटा कौन बड़ा है।

कौन है छोटा कौन बड़ा है - 2

आलू छोटा कद्दू बड़ा है -2

कौन है छोटा कौन बड़ा है - 2

पौधा छोटा पेड़ बड़ा है - 2

कौन है छोटा कौन बड़ा है - 2

पेंसिल छोटी बेग बड़ा है - 2

कौन है छोटा कौन बड़ा है - 2





2. क्या है एक, क्या है अनेक

क्या है एक क्या है अनेक - 2

चांद है एक तारे अनेक - 2

क्या है एक क्या है अनेक - 2

पेड़ है एक पत्तियां अनेक - 2

क्या है एक क्या है अनेक - 2

टीचर एक , बच्चे है अनेक - 2

क्या है एक क्या है अनेक - 2


3. एक कौआ प्यासा था।

एक कौआ प्यासा था, -2

जग में पानी थोड़ा था, -2

कौए ने डाले कंकड़, -2

पानी आया ऊपर । -2

कौए ने पिया पानी, -2

खत्म हुई कहानी । -2



4. सूरज गोल, चन्दा गोल

सूरज गोल, चन्दा गोल, 

सारी धरती गोल-गोल ।

मम्मी की रोटी गोल-गोल,

पापा का पैसा गोल-गोल ।

दादा जी की पगड़ी गोल-गोल,

दादी जी का चश्मा गोल-गोल.

हम भी गोल, तुम भी गोल,

सारी दुनिया गोल - मटोल ।





5. गुब्बारे

गुब्बारों का लेकर ढेर, देखो आया है शमशेर ।

हरे, बैंगनी, लाल, सफ़ेद, रंगों के हैं कितने भेद ।

कोई लंबा, कोई गोल, लाओ पैसे, ले लो मोल।

मुट्ठी में लो इनकी डोर, इन्हें घुमाओ चारों ओर ।

हाथों से दो इन्हें उछाल, लेकिन छूना खूब सँभाल।

पड़ा किसी के ऊपर जोर, एक जोर का होगा शोर ।

गुब्बारा फट जाएगा, खेल खत्म हो जाएगा।

-हरिवंशराय बच्चन


6. जिसने सूरज चाँद बनाया

जिसने सूरज चाँद बनाया

जिसने तारों को चमकाया

जिसने फूलों को महकाया

जिसने चिड़ियों को चहकाया

जिसने सारा जगत बनाया

हम उस ईश्वर के गुण गाएँ ।

उसे प्रेम से शीश झुकाएँ ।।


7. सोने की चिड़िया 

सोने की चिड़िया, सोने के पर,

चिड़िया उड़ गई, फर- फर-फर

मोती का दाना लाई चिड़िया,

मेरी गोद में आई चिड़िया ।

हम दोनों मिलकर गाएँगे,

नील गगन में उड़ जाएँगे।


8. सड़क


लम्बी-चौड़ी सड़क चली।

दिखती है यह बड़ी भली ।।

इस पर मोटर दौड़ी जाती।

पौं- पौं करती, शोर मचाती।।

बीच सड़क कभी मत चलना ।

चोट खाओगे, नहीं तो वरना ।।

पैदल पारपथ से जाना।

सड़क के नियमों को निभाना ।।


9. पानी बरसा

पानी बरसा छम-छम-छम,

छाता लेकर निकले हम।

फिसला पैर तो गिर गए हम,

नीचे छाता ऊपर हम।





10. हाथी

हाथी राजा सबको भाते, 

बस गन्ने और केले खाते।

रोज नदी के तट पर जाते,

पानी से फिर खूब नहाते ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो - सामूहिक गीत | jivan me kuch karna hai to man ke maare mat baitho - Samuhik geet

प्रेरणा गीत / सामूहिक गीत जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो । आगे-आगे बढ़ना है तो, हिम्मत हारे मत बैठो ॥ चलने वाला मंजिल पाता, बैठा पीछे रहता है । ठहरा पानी सड़ने लगता, बहता निर्मल होता है पाँव मिले हैं चलने के खातिर, पाँव पसारे मत बैठो जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो । आगे-आगे बढ़ना है तो, हिम्मत हारे मत बैठो ॥ तेज दौड़ने वाला खरहा, दो पाँव चलकर हार गया । धीरे-धीरे चलता कछुआ, देखो बाजी मार गया चलो कदम से कदम मिलाकर, दूर किनारे मत बैठो  आगे-आगे बढ़ना है तो, हिम्मत हारे मत बैठो ॥ धरती चलती तारे चलते, चाँद रात भर चलता है । किरणों का उपहार बांटने, सूरज रोज निकलता है हवा चले तो महक बिखरे, तुम भी ठाले मत बैठो आगे-आगे बढ़ना है तो, हिम्मत हारे मत बैठो ॥ जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो । आगे-आगे बढ़ना है तो, हिम्मत हारे मत बैठो ॥

Happy father's day top 10 stories in hindi stories | Father's day ki kahaniyan hindi me

हर पिता असाधारण होता है, क्योंकि उनके संघर्ष, जिजीविषा और अनुभव के आगे हर चुनौती छोटी है । इस लेख में है आपके लिए father's day पर 10 कहानियां लेकर आए है जो आपको जरूर पसंद आएंगी। 1. सम्मान का संकल्प बात उन दिनों की है. जब मुझे आठवीं के रिजल्ट के बाद बाद भविष्य के लिए नौवीं कक्षा में किस सब्जेक्ट कार चुनना है, यह तय करना था। लापरवाही के चलते मैं यह डिसाइड नहीं कर सका कि कौन-सी ब्रांच में एडमिशन लेना है। इसी बीच एडमिशन की डेट निकल जाने का पता चला तो मैं दौड़ा-दौड़ा स्कूल गया। अध्यापक से बात की तो उन्होंने कहा, तारीख निकल चुकी है। अब तुम्हारा एडमिशन नहीं हो सकता। मैंने स्कूल के प्रिंसिपल से अनुरोध किया तो वो भी बोले, तुम लेट हो गए। मैंने कहा, ठीक है। पर मैं पिताजी को क्या जवाब दूंगा ? मेरी तो हिम्मत भी नहीं होगी। मैं उन्हें भेजता हूं। आप ही उन्हें बता देना। यह सुनते ही प्रिंसिपल बोले, 'अरे, उन्हें मत भेजना।' मैं मायूस होकर घर पहुंचा तो पिताजी मेरा इंतजार ही कर रहे थे। उन्होंने पूछा एडमिशन हुआ क्या? मैंने कहा, प्रिंसिपल साहब से आप ही पूछ लीजिए। इस पर पिताजी मेरा हाथ पकड़कर स्कूल...

तृप्ति डिमरी की जीवनी - Tripti dimri ki jivni in Hindi

तृप्ति डिमरी ने अपने फिल्मी करियर में अपनी पहचान बनाने के लिए कई संघर्ष किए हैं। उनकी खासियत है कि वे प्रामाणिक और भावनात्मक रूप से गहरी भूमिकाओं को प्राथमिकता देती हैं। यहां उनकी जीवनी के कुछ और पहलू दिए गए हैं। प्रारंभिक जीवन तृप्ति का जन्म 23 फरवरी 1994 को हुआ। उनका परिवार उत्तराखंड से है, लेकिन उनका पालन-पोषण दिल्ली में हुआ। बचपन से ही उन्हें अभिनय और कला के प्रति रुचि थी। वे न केवल पढ़ाई में बल्कि सह-पाठयक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय थीं। करियर की शुरुआत पोस्टर बॉयज (2017): इस फिल्म में तृप्ति का किरदार छोटा था, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय कौशल से ध्यान आकर्षित किया। लैला मजनू (2018): इम्तियाज अली द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में तृप्ति ने लैला का किरदार निभाया। उनकी मासूमियत और गहराई से भरी अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। बुलबुल (2020): नेटफ्लिक्स की इस फिल्म ने तृप्ति के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसमें उन्होंने एक रहस्यमय और सशक्त महिला का किरदार निभाया। प्रसिद्धि और प्रशंसा तृप्ति को उनकी फिल्मों के लिए कई पुरस्कार और सम्मान मिले हैं। फिल्मफेयर ...